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Pearls लिमिटेड – एक परिचय – एक पोंजी घोटाला

कंपनियों के जयपुर रजिस्ट्रार अधिनियम 1956 के तहत 13 फरवरी, 1996 को पंजीकृत पर्ल एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) एक रियल एस्टेट कंपनी थी जिसे पर्ल्स भी कहा जाता था। यह नोएडा, जिरकपुर, दिल्ली, मुंबई, भटिंडा, वडोदरा, मदुरै, मोहाली आदि के क्षेत्रों में रियल एस्टेट डेवलपमेंट परियोजनाओं में बोहत प्रशिद्ध है । न केवल निर्माण परियोजनाओं में, बल्कि पीएसीएल कई कृषि परियोजनाओं का भी हिस्सा था।

पीएसीएल घोटाला कैसे हुआ?

पर्ल्स ने 6 करोड़ से अधिक निवेशकों को धोखा दिया था जिन्होंने पीएसीएल में अपने कड़ी मेहनत के पैसे का निवेश किया था। पिछले 15 वर्षों में पीएसीएल और पर्ल गोल्डन वन लिमिटेड (पीजीएफएल) से अवैध रूप से निवेशकों से 49,100 करोड़ रूपए एकत्र किए गए थे, बिक्री के नाम पर निर्मल भंगू समूह के द्वारा नियंत्रित दो कंपनियां कृषि भूमि के विकास में निवेशकों को उच्च रिटर्न का वादा किया और उनसे पैसा इकठा किया लेकिन निवेशकों द्वारा निवेश किए गए पैसो में से एक प्रतिशत भी नहीं मिला।

भारत के किस क्षेत्र से, पीएसीएल एजेंट और निवेशक सबसे ज्याद संख्या में हैं ?

अधिकांश पीएसीएल एजेंट और निवेशक भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों और गांवों से संबंधित हैं। इन गरीब लोगों ने जो कुछ भी अपना पैसा जमा किया था, उसका निवेश पर्ल्स में किया और पर्ल्स ने उनका मूर्ख बना दिया और इनकी साडी उम्र भर की बचत लूट ली। इन लोगों को अब एक आशा है कि उनकी निवेश राशि एक दिन वापस आ जाएगी लेकिन धनवापसी प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। जिससे सभी निवेशक काफी निराश हैं और सेबी से नाखुश भी हैं

निवेशकों से लिया गया पैसा कहां है?

6 करोड़ निवेशकों द्वारा निवेश किए गए पैसे का कभी भी मोती समूह द्वारा उपयोग नहीं किया गया, अर्थात निवेशित धन वास्तव में निर्मल सिंह भंगू , उसके दोस्तों और परिवार के सदस्यों द्वारा किया गया| पर्ल समूह द्वारा सुप्रीम कोर्ट को प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सूचित करता है कि पीएसीएल ने अपनी सहयोगी कंपनियों और मैनेजमेंट के लोगों के नाम पर 7 वर्षों में भारत में 30 हजार से अधिक एकड़ जमीन खरीदी थी।

1998 में इस घोटाले को कैसे रोका जा सकता था

पर्ल एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) एक रियल एस्टेट कंपनी थी जिसे अधिनियम 1956 के तहत 13 फरवरी 1996 को कंपनी के जयपुर रजिस्ट्रार के साथ पंजीकृत थी | यह पर्ल्स के नाम से भी जानी जाती थी । पहली बार 1998 में सेबी द्वारा इसकी जांच की गई थी, लेकिन उचित सबूत और कुछ डॉक्यूमेन्ट्स की कमी के कारण पीएसीएल ने कोर्ट केस जीतने में कामयाबी हासिल कर ली

लेकिन सेबी ने 2015 में और अधिक मजबूत साक्ष्य और सबूत इकठे किये जिस के साथ सेबी यह साबित करने में कामयाब हुई के पर्ल्स अपने इन्वेस्टर्स क साथ धोखा कर रही है और इसे सेबी के नियमो का उलघन किया है और धोखा धड़ी के आरोप में कोर्ट में यह एक एक चित फण्ड स्कैम घोसित कर दिया

सेबी द्वारा पीएसीएल के खिलाफ दर्ज FIR: यह वास्तव में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) था जिसने जांच शुरू की और 2015 में पहली फिर दर्ज की। सीबीआई द्वारा की गई जांच के आधार पर यह शिकायत ईडी द्वारा दायर की गई थी। 2015 में पर्ल समूह के अध्यक्ष, निर्मल भांगू के साथ उनके अन्य साथी गिरफ्तार किए गए थे।

सेबी द्वारा 2015 में पीएसीएल कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और ब्लैकलिस्ट किया गया था। और यह खुलासा हुआ कि पर्ल ने 6 करोड़ से अधिक निवेशकों को धोखा दिया था जिन्होंने पीएसीएल में अपने कड़ी मेहनत के पैसे का निवेश किया था।

कैसे पीएसीएल लोकप्रिय हुआ और 6 करोड़ इन्वेस्टर्स में विश्वास बना पाया ?

1) पीएसीएल ने एक पी 7 समाचार चैनल शुरू किया

पीएसीएल ने एक समाचार चैनल चलाया जिसे पी 7 नाम दिया गया था, जो कुछ साल पहले शुरू हुआ था। यह लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने और पैसे बनाने का एक स्रोत था। और इसके उद्घटान में बड़े बड़े लोग आये जिनमे से कुछ प्रमुख नाम है बीजेपी से राजनाथ सिंह , बॉलीवुड से कररीना कैफ क्रिकेट जगत से युवराज सिंह और हरभजन सिंह इसके अल्वा और भी बोहत से नाम है जिन पर लोग भरोसा करते हैं

ऐसे लोगो के पी 7 और पर्ल्स के साथ जुड़ा देख कर लोगो ने निर्मल सिंह भ्नगू की कम्पनी पर आंख बंद करके भरोसा किया और दिन पर दिन और इन्वेस्टर्स जुड़ते गए

2) पर्ल्स का बड़ी हस्तियाँ और राजनेता से कनेक्शन

पीएसीएल रियल एस्टेट कंपनी एक सामान्य दूध बेचने वाले आदमी ने द्वारा शुरू की थी और कुछ हस्तियों, क्रिकेटरों और राजनेताओं ने पर्ल्स से जुड़ कर इसे प्रसिद्ध किया था। सीबीआई ने खबर दी थी कि दोनों खिलाड़ियों यानी युवराज और हरभजन को पीएसीएल समूह द्वारा मोहाली में फ्लैट दिए गए हैं वो भी गिफ्ट की तोर पर

3) विज्ञापन के लिए बड़े ब्रांड एंबेसडर

पीएसीएल द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों को बढ़ावा देने में कई क्रिकेटरों और हस्तियां शामिल थीं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेट ली को ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप में कंपनी को बढ़ावा देने के लिए अपने ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी नियुक्त किया।

पीएसीएल घोटाले के मास्टर माइंड – निर्मल भंगू

निर्मल भंगू, जो कि 6 करोड़ निवेशकों के साथ धोखा करने के लिए ज़िम्मेदार है , एक दूध बेचने वाला आदमी इतने बड़े पीएसीएल घोटाले का मास्टरमाइंड है, जिसने प्रत्येक योजना को बिना किसी गड़बड़ के सफल किया। भगू और उसके साथी कौन थे , यह जानने के लिए निम्नलिखित विवरण देखें।

निर्मल भंगू और उनके परिवार का इतिहास

भांगू कुछ साल पहले एक आदमी था लेकिन प्रॉपर्टी के लेन देन में उनकी रुचि ने उन्हें अचल संपत्ति का राजा बना दिया। निर्मल सिंह भंगू की दो बेटियां और एक बेटा है। कुछ साल पहले उन्होंने अपने बेटे को एक दुर्घटना में खो दिया और उसके बाद उनकी दो बेटियां और उनके 2 दामाद ऑस्ट्रेलिया में व्यापार की देखभाल कर रहे हैं । उनके बेटे की मृत्यु के बाद उनकी बहू ने भी उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। जिसमे उसने प्रॉपर्टी के बंटवारे को लेकर उनपर इलज़ाम लगया है

पीएसीएल घोटाले में उनकी गिरफ्तारी के एक दिन पहले, निर्मल ने क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया के पॉश क्षेत्र में अपनी बेटी को दस लाख डॉलर का घर दिया था। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने क्वींसलैंड में उसकी अच्छी निवेश परियोजनाओं के लिए निर्मल सिंह भंगू को सम्मानित भी किया है।

उनके बेटे और बेटी को निर्मल सिंह की अनुपस्थिति में यह पुरस्कार मिला। उनके परिवार के सदस्यों के ऑस्ट्रेलियाई सरकार के साथ अचे संबंध भी हैं और सरकार की मदद से वे किसी भी प्रकार की संपत्ति खरीदने के में कामयाब रहे। गोल्ड कोस्ट पर शेरेटन मिराज रिज़ॉर्ट इस के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक है, जिसे आसानी से खरीदा नहीं जा सका।

पीएसीएल घोटाले में कितने लोग शामिल हैं?

6 करोड़ निवेशकों से जुड़े इस पोंजी घोटाले ने सभी को चौंका दिया है और पीएसीएल ने अपने निवेशकों को बुरी तरह से निराश कर दिया और उन्हें एक अपार्टमेंट देने के बारे में झूठ बोला और उन्हें अपनी पूरी बचत का निवेश पर्ल्स में किया।

पर्ल्स के सभी बड़े अधिकारी इस घोटाले में शामिल हैं एक भी डायरेक्टर , मैनेजर या मनाज्मेंट मेंबर ऐसा नहीं हैं जिसके नाम प्रॉपर्टीज नहीं हैं। निवेशकों के पैसे से खरीदी गयी प्रॉपर्टी इन्ही लोगो क नाम है

पीएसीएल घोटाले के लिए जेल में कितने लोग हैं?

भांगू के परिवार के सदस्यों के अलावा, पीएसीएल घोटाले में पीएसीएल/ (पर्ल समूह) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक और उनके अन्य तीन अधिकारी सुखदेव सिंह (एमडी और निदेशक – पीएसीएल में प्रमोटर), सुब्रत भट्टाचार्य (पीजीएफएल / पीएसीएल पोंजी योजना मामले में ईडी और गुरमीत सिंह (ईडी फाइनेंस) को जांच के दौरान असंगत वक्तव्य और असहयोग के बाद सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था। धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और आईपीसी के 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन चार के खिलाफ।

पीएसीएल ऑस्ट्रेलिया लिंक

भांगू ने न केवल भारत में निवेश किया बल्कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसे विदेशी स्थानों में भी भारी निवेश किया। ऑस्ट्रिलाई सरकार के बड़े अधिकारियों से मिलकर भ्नगू की टीम ने वहां बहुत से प्रॉपर्टीज खरीदी और सारा पैसा किसी दूसरी कंपनी के माध्यम से वह ट्रांसफर किया गया। ये एक सोची समझी प्लानिंग थी के कैसे पर्ल्स का पैसा दूसरी कम्पनी में लगे जा सके जिससे आने वाले समय में खुलासा होने पर इन प्रॉपर्टीज पर सरकार की कोई नज़र न पड़े

ऑस्ट्रेलिया में भांगू ने कितना निवेश किया?

पीएसीएल ने ऑस्ट्रेलिया में भारी राशि का निवेश किया है। कुछ साल पहले, पीएसीएल ने क्वींसलैंड में गोल्ड कोस्ट पर शेरेटन मिराज होटल नामक ऑस्ट्रेलिया में अपनी सबसे प्रमुख संपत्ति खरीदी। जो 2013 में लगभग 900 करोड़ थी।

ऑस्ट्रेलियाई न्यायालय में पीएसीएल मामले की स्थिति

17 सितंबर 2018 को, सेबी ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने पीएसीएल निवेशकों की तरफ से धनवापसी के दावे को स्वीकार कर लिया है। सेबी ने एक बयान में कहा कि निवेशकों से पीएसीएल लिमिटेड द्वारा एकत्रित धन का उपयोग ऑस्ट्रेलिया में कुछ संपत्तियों के खरदीने के लिए किया गया था। अब जब ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने अनुमति दी है, तो सेबी ऑस्ट्रेलिया में खरीदे गए पीएसीएल के विभिन्न प्रॉपर्टीज को बेचने के लिए आगे बढ़ सकती है।

अभी कितनी प्रॉपर्टी की सेल सेबी ने की है और उससे कितना पैसा निवेशकों का सेबी के पास आज्ञा है उससे सम्भदित जानकारी सेबी ने निवेशकों नहीं दी है जो की एक महतवपूरण विषय है

सेबी को यह जानकारी देनी किये के निवेशकों का कितना पैसा उन्होंने रिकवर किय और कितना रिकवर करना बाकी है और कोण कोण से ऐसे सोर्स हैं जहा से इन्वेस्टर्स का पैसा रिकवर किया जायेगा

सेबी हेल्पलाइन नंबर और वेबसाइट की जानकारी

Website www.sebipaclrefund.co.in
Helpline Number 022 61216966
Support Email sebi@sebi.gov.in
Format of Documents pdf, jpg or jpeg
Who Can Apply Policy Holder, Guardian, Nominee
Last Date 31st July 2019

पीएसीएल रिफंड फॉर्म की स्थिति जानने के लिए, निवेशक “022 61216966” पर कॉल कर सकते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सेबी के पास देखने के लिए हजारों मामले हैं। लेकिन निवेशकों और उनके प्रश्नों को देखकर सेबी ने पर्ल्स निवेशकों के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर प्रदान करने का निर्णय लिया । धनवापसी मांगने वाले निवेशकों को अपने आवेदनों को www.sebicommitteepaclrefund.com पर सभी डॉक्यूमेंट अपलोड करके अपने विवरण के साथ भेजना होगा।

सेबी धनवापसी के लिए रिकवरी कैसे और कहाँ से करेगी

1. बैंकों में पीएसीएल के फिक्स्ड डिपॉजिट्स से :

सेबी को 23 बैंकों के साथ पीएसीएल के 1121 एफडीआर मिले हैं, जिनके डाक्यूमेंट्स सेबी ने जबत कर लिए हैं । समिति ने अब तक9 बैंकों से 4,93,628,76.84 रुपये रिकवर किए हैं।

2. सिस्टमैटिक वेंचर कैपिटल ट्रस्ट से रिकवरी:

लोढा समिति ने ईडी से एक रिपोर्ट प्राप्त की जिसमें कहा गया है कि पीएसीएल लिमिटेड की लगभग 25 सहायक कंपनियां जिन्होंने कथित रूप से सिस्टमैटिक वेंचर कैपिटल ट्रस्ट के बैंक खाते में 113.45 करोड़ रुपये डलवाये और 16,86,98,766 रुपये को सिस्टमैटिक ट्रस्ट से समिति द्वारा रिकवर किया गया था।

3. पीएसीएल लिमिटेड द्वारा खरीदे गए होटल के किराए से :

लोढा समिति को गोवा में चंडीगढ़, जिराकपुर, कोल्वा और कालंग्यूट समुद्र तटों के क्षेत्रों में होटलों के निर्माण के लिए पीएसीएल लिमिटेड द्वारा लीज पर दी गई संपत्तियों के दस्तावेज मिल गए हैं। एक निरीक्षण आयोजित किया गया था और यह पता चला था कि इन तीनों होटलों को पीएसीएल लिमिटेड कंपनी द्वारा इंडिया डैटसेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को 20 साल तक पट्टे पर दिया गया था और भारत डेटासेक कंपनी ने समिति को किराए पर भुगतान में देरी कर दी है। समिति ने रु। इन तीन होटलों से 72, 37,393। हरम के करनाल जिले में धरमपुर (हिमाचल प्रदेश), नोएडा (उत्तर प्रदेश) और एमआर होटल में स्थित पट्टे पर कुछ अन्य होटल दिए गए हैं।

4. ऑस्ट्रेलियाई संपत्ति

ऑस्ट्रेलिया में अन्य पीएसीएल संपत्तियों से उत्पन्न 5,23,14,20,000 रुपये और शेरेटन मिराज होटल 8,89,34,14,000 रुपये

सेबी पर निवेशकों की प्रतिक्रिया है

धन वापसी की प्रक्रिया देरी से होने के कारण पीएसीएल निवेशकों को सेबी पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है। धनवापसी मांगने वाले निवेशकों की कुछ प्रतिक्रियाएं निम्नलिखित हैं:

1. सेबी निवेशकों को धनवापसी करने की प्रोसेस में समय बर्बाद कर रहा है:

लगभग 6 करोड़ निवेशक अपनी धनवापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं और सेबी ने पहले से ही धनवापसी प्रॉसेस के लिए इतना समय बर्बाद कर दिया है और सेबी अभी भी और समय लगा रहा है । अभी कैवे 2500 तक्क की धनवापसी हो पायी है जिनकी सांख्य अबोहत ही कम् थी क्यूंकि ज्यादातर इन्वेस्टर्स का अमाउंट 250 से अधिक है दूसरा राउंड सेबी ने शुरू तो कर दिया है लेकिन इसके बाद कब तक्क इन्वेस्र्टर्स के अकाउंट में पैसा आएगा ये कहना मुश्किल है

2. सेबी अभी भी पर्ल्स की सभी प्रॉपर्टीज सीज़ नहीं कर पायी

यहां ध्यान दिया जाना चाहिए के सेबी द्वारा जब्त की गई पर्ल्स की पर्याप्त मात्रा में संपत्ति है, और फिर भी सेबी को धनवापसी की व्यवस्था करना इतना कठिन लगता है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने पीएसीएल संपत्ति भी हासिल की और इसे भारत सरकार को सौंप दिया, लेकिन यह पैसा और संपत्ति कहां जा रही है इसका अभी तक इन्वेस्टर्स कोई हिसाब नहीं दिया गया

3. मध्यम आय वाले निवेशकों को समस्याएं

जिन लोगो ने पर्ल्स में निवेश किया हैं वे आम तौर पर मध्यम वर्ग के परिवारों से संबंधित हैं और उन्होंने इस धोखेबाज कंपनी में अपनी आय का निवेश किया, यह सोचकर कि यह दोगुना हो जाएगा लेकिन उन्हें पता नहीं था कि उनके हाथों में कुछ भी नहीं रहेगा ।

4. निवेशकों का अपमान

पैसा वापसी में देरी ने निवेशकों को पहले ही परेशान कर दिया है और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया उन्होंने अपने सभी महत्वपूर्ण कार्यों को छोड़ दिया है और अब उनके दिल में सर्कार सेबी के लिए गुस्सा और मजबूरी में फांसी आँखों में आंसू हैं क्यूंकि अपनी जीवन भर कमाई उन्होंने इस चीट फण्ड सकाम में फसा ली है यह जमा पूंजी किसी की बेटी और किसी के भेना की शादी क लिए कमा की थी बोहत से बुजुर्ग ऐसे हैं जो अब अपना इलाज़ भी नहीं करवा पा रहे हैं क्यूंकि सर्जरी जमा पूंजी तो पर्ल्स खा गयी

5. सेबी भरोसेमंद नहीं है

अब इन लोगों को सेबी के रुख पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है कि पीएसीएल घोटाले के पीड़ितों की धन वापसी के लिए सेबी सुच रही है या नहीं। सेबी को इन प्रभावित निवेशकों पर विश्वास बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि वे आशा की किरण देख सकें कि उनके पैसे वापस किए जाएंगे।

6. सेबी द्वारा आयोजित कोई खुली वार्तालाप नहीं

आज तक, सेबी ने इन लोगों के मुद्दों के समाधान के लिए कोई खुला सम्मेलन या कोई बैठक नहीं की है। धनवापसी और वसूली प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं होने के कारण, पीएसीएल पीड़ितों का मानना ​​है कि सेबी वास्तव में पीएसीएल निवेशकों को समझ नहीं रही है के उनकी समस्या क्या है। सेबी को इस धनवापसी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जानी चाहिए ताकि यह लोगों को आश्वस्त कर सके कि देरी वास्तविक रूप से हो रही है इसमें सेबी का कोई हस्तक्षेप नहीं है।

7. इसी तरह की चीजें ‘सहारा केस’ में हुईं

यह बहुत स्पष्ट है कि पीएसीएल निवेशक सेबी और भारतीय सरकार पर अपना विश्वास खो देंगे क्योंकि सेबी ने सुब्रत रॉय की कंपनी सहारा को ब्लैकलिस्ट किया था, वैसे ही उसने पीएसीएल के साथ भी किया था। लेकिन अंतिम परिणाम क्या है? इन दोनों कंपनियों के पीड़ित अभी भी उनकी याचिका सुनने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

पीएसीएल रिफंड में AISO की भूमिका

AISO का परिचय

अखिल भारतीय सुरक्षा संगठन एक गैर-सरकारी संगठन है जो पीएसीएल पीड़ितों का समर्थन करने के लिए सड़कों पर ले गया। इस समूह ने सरकार बनाने के लिए अथक रूप से काम किया है और सेबी को एहसास है कि निवेशक अपने पैसे वापस मांग रहे हैं। एआईएसओ सक्रिय रूप से अपने फेसबुक पेज पर ध्राना और मार्च के बारे में पोस्ट कर रहा है जो प्रभावित पीएसीएल निवेशकों से जुड़े थे। इस संगठन के प्रयासों को बर्बाद नहीं किया गया और सेबी ने 2500 रुपये तक धनवापसी के साथ दावेदारों को धनवापसी करके धनवापसी के पहले बहुत सारे रिहांडों को रिहा कर दिया।

कौन AISO का नेतृत्व कर रहा है ?

मजबूत और बहादुर सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र पाल सिंह धनकंद एआईएसओ का नेतृत्व कर रहे हैं। धनकंद सभी निवेशकों को रिफंड मांगने के लिए पीएसीएल पर सभी आवश्यक जानकारी और अपडेट प्रदान करते है।

ऑस्ट्रेलियाई संपत्ति वसूली में AISO की भूमिका:

AISO ने PACL ऑस्ट्रेलियाई संपत्ति की वसूली में भी बड़ी भूमिका निभाई है। इस संगठन द्वारा लगाए गए दबाव निवेशकों को वापस भारत वापस लाने के लिए पर्याप्त थे। एआईएसओ की भारी अपील पर यह था कि सेबी ने ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार के सामने पीएसीएल के ऑस्ट्रेलियाई गुणों को बेचने के लिए याचिका दायर की, जिसके बाद संघीय सरकार ने सभी मोती ऑस्ट्रेलियाई संपत्ति की बिक्री और आय की अनुमति दी।

पीएसीएल रिफंड प्रक्रिया

क्यों निवेशक सेबी और सरकार पर भरोसा नहीं करते?

बहुत से कारण हैं जसिकी वजय से निवेशकों को सरकार और सेबी पर अपना विश्वास खो बैठे हैं । उन्होंने निवेशकों को वापस करने के लिए बहुत समय लगाया जिनकी दावा राशि 2500 रुपये तक थी। निवेशकों के बीच पहले से ही बहुत सारे आक्रोश हैं क्योंकि सेबी ने कुछ निवेशकों को वापस करने के लिए कितना समय लगा दिया । अब समय ही बताएगा कि निवेशकों को 2500 रुपये से अधिक धनवापसी के लिए सेबी कितना समय लगानी वाली है । क्यूंकि 2500 रुपये तक की राशि वाले इन्वेस्टर्स की संख्या बहुत ही कम् थी और इससे ऊपर की राशि वाले इन्वेस्टर्स की संख्या करीब करीब 5 करोड़ है

तो अब सेबी कितनी जल्दी से चुस्ती से ये प्रोसेस कम्पलीट करने क बाद रिफंड देना ये सभी इंतज़ार क्र रहे हैं

पीएसीएल निवेशक का धरणों पर बैठना

सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रभावित पीएसीएल निवेशकों द्वारा कई अलग-अलग संगठनों का गठन किया गया। इन संगठनों ने कई विरोध प्रदर्शन भी किए , सेबी और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा दिखाने के लिए मार्चों को बाहर निकाला था। सबसे बड़ा विरोध राम लीला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, लेकिन ऐसा लगता था कि सरकार और सेबी बैकफुट पर थीं और चुपचाप कवर धरना प्रदर्शन भी रिएक्शन सेबी या सरकार का नहीं आया

इसी इंवेस्टरस्व अधिक नराज़ चल रहे हैं और उनका कहना है के इससे साफ़ साफ़ दीखता है के सेबी के पास हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं है और वो कुछ अधिक प्रयास भी नहीं क्र रही है ताकि इन्वेस्टर्स का पैसा जल्दी से जल्दी लोटा सके

एजेंटों और निवेशकों के आत्महत्या के मामले

इसके अलावा, एजेंटों और पीएसीएल निवेशकों के कुछ आत्महत्या मामलों ने इस घोटाले को प्रकाश में लाया। इससे लोगों को मोती कंपनी के असली चेहरे को पहचानने में भी मदद मिली, लेकिन यह निश्चित रूप से उन लोगों के लिए एक दुर्दशा है जिन्होंने इस रियल एस्टेट कंपनी में भारी मात्रा में निवेश किया था।

निवेशकों ने सेबी और भारतीय सरकार के लिए एक नारा उठाया है, जो ‘पेहेल भुगतन फर मटकादान’ कहता है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि प्रभावित निवेशक आने वाले लोकसभा चुनावों में मतदान करेंगे यदि उन्हें समय पर उनकी धनवापसी प्रदान की जाती है।

तेजी से धनवापसी के लिए निवेशकों के लिए क्या भारत सरकार कर सकती है?

भारतीय सरकार पीएसीएल रिफंड को सबसे तेजी से धनवापसी सुनिश्चित करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकती है। सरकार पर्ल समूह को अपनी सभी छिपी संपत्ति, भूमि संपत्ति और जो कुछ भी पीएसीएल ने खुलासा नहीं किया है, उसे प्रकट करने के लिए दबाव डाल सकता है। दूसरा, सरकार सेबी और लोढा कमेटी से धनवापसी प्रक्रिया को तेज करने और एक निश्चित समय सीमा जारी करने के लिए कह सकती है जिसमें धनवापसी के आदेश यह सुनिश्चित करने के लिए करते हैं कि धनवापसी अधिकारियों के पास कोई छुपा हित नहीं है। इसके अलावा यदि सरकार इन निवेशकों को किसी भी तरह से मदद करती है, तो उन्हें स्पष्ट रूप से 2019 चुनावों के लिए 6 लाख भारतीय नागरिकों का वोट बैंक मिलता है।

धरना और स्ट्राइक्स को नजरअंदाज कर मीडिया

पीएसीएल निवेशकों द्वारा किए जाने वाले धरण और हमलों को पूरी तरह से मीडिया व्यक्तियों द्वारा अनदेखा किया जा रहा है। वे इन प्रभावित लोगों की दुर्दशा को प्रकाश में नहीं लाना चाहते हैं, ऐसे असहाय लोगों की आवाज होने के बारे में भूल जाओ। निवेशकों ने राम लीला मैदान, नई दिल्ली और जंतर मंतर में भी एक विशाल ध्रुना का मंचन किया। इसे मीडिया और सरकार द्वारा समान रूप से अनदेखा किया गया था। और वहां कई और हमले, ध्राना और मार्च हैं जो निवेशक लंबे समय से बाहर चल रहे हैं लेकिन उनकी आवाज अनसुनी लगती है।

सेबी का पहला दौर 2500 रुपये तक पूरा हुआ

सेबी ने 2500 तक पीएसीएल रिफंड का पहला दौर पूरा किया

इस साल फरवरी के महीने में, लोहा समिति ने मोती अचल संपत्ति संपत्ति घोटाले के मामले को देखने के लिए नियुक्त किया, निवेशकों से धनवापसी दावों को आमंत्रित किया, एक प्रक्रिया जो 31 मार्च, 2018 तक खुला था। सेबी की आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम समाचार कहते हैं कि लोढा समिति ने आज तक अपने दावे आवेदनों में उल्लिखित विवरणों के आधार पर 1, 13,353 पीएसीएल निवेशकों को वापस कर दिया है।

धनवापसी के बाद निवेशकों को कितना पैसा मिला?

1, 13,353 पीएसीएल निवेशकों ने 2500 तक की राशि का दावा करने के साथ अपनी धनवापसी प्राप्त की है। निवेशकों के दूसरे पूल की वापसी के लिए अब उनकी वापसी है।

धनवापसी के पहले दौर के बाद सेबी के पास अभी भी कितना पैसा है?

अब ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार ने ऑस्ट्रेलिया में पीएसीएल की संपत्ति / परिसंपत्तियों की बिक्री की मांग करने के लिए एसईबीआई (20 जुलाई, 2018 दिनांकित) द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है, निवेशकों को अब राहत का सामना करना पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया में उठाए गए मोती की सभी संपत्ति / संपत्ति संघीय सरकार द्वारा बेची गई है और पैसा अधिग्रहित किया गया है। इसके अलावा विभिन्न स्रोतों से बरामद की गई सभी संपत्ति भी धनवापसी प्रक्रिया के लिए जोड़ दी जाएगी।

ऑस्ट्रेलियाई संपत्तियों से वसूली

रुपये। ऑस्ट्रेलिया में पीएसीएल के विभिन्न बिखरे हुए संपत्तियों से उत्पन्न 5,23,14,20,000। शेरेटन मिराज होटल गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया के मूल्य पर स्थित है। 8,89,34,14,000। मोती की ऑस्ट्रेलियाई संपत्ति / संपत्ति रुपये से अधिक होने के लिए बाहर आती है। कुल में 1, 400 करोड़।

2500 से अधिक धनराशि वाले Investor कैसे PACL Refund के लिए online आवेदन करे?

  1. सेबी ने कहा था कि लोढ़ा पैनल ने प्रभावित PACL निवेशकों से दावे आमंत्रित किए हैं जिनकी कुल प्रिंसिपल राशि PACL के साथ Rs.2, 500 से अधिक है। यह रिफंड का दूसरा दौर है।
  2. रिफंड मांगने वाले निवेशकों को www.sebipaclrefund.co.in पर अपने सभी दावों को PACL नीतियों के सभी विवरणों और स्कैन किए गए कॉपियों को भेजना होगा।
  3. रिफंड फॉर्म के आवेदन 30 अप्रैल, 2019 से बढ़कर 31 जुलाई 20190कर दी गयी है
  4. सेबी की वेबसाइट पर एक डेमो वीडियो उपलब्ध है, ताकि पीएसीएल निवेशक पीएसीएल रिफंड आवेदन पत्र के लिए आवेदन कैसे कर सकते हैं।

5,000 रुपये तक का पीएसीएल रिफंड

In the second phase, 277544 investors having claim amount up to Rs. 5000/- have been paid.

 

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21 thoughts on “पीएसीएल ताजा समाचार 2021 – रिफंड फॉर्म यहां भरें

  1. आत्मा हत्या करने के बाद ही मिलेगा क्या कृपया कर कोई तो सही समाचार बताएं प्लीज सर

  2. Pacl का पेसा कब मिलेगा कुछ पता नहीं चल रहा

  3. पैसा पता नहीं कब मिलेगा

  4. मै राजकुमार ग्राम अबुपुर गाजियाबाद यूपी मुरादनगर गरीब लोगो ने PACL में पैसा निवेश किया अगर जनता का पैसा देना है तो काउंटर खोले सरकार वरना सभी निवस्को का पैसा नहीं मिलेगा ओर जो PACL में एजेंट थे वो आत्म हत्या करने को मजबूर होंगे निवेशक ऐसा करने पर मजबूर कर देंगे मेरी सरकार से प्रार्थना है कि जनता का पैसा काउंटर से मिले ओंन लाइन पैसा सब लोग प्राप्त नहीं कर सकते गरीब निवेस्को की जान बचानी है और वाहवाही लेनी है तो सरकार गरीबों का पैसा दिलाए सेबी की बहुत मेहरबानी होगी धन्यवाद जी 9997117295

  5. गरीबों का पैसा मत खाओ हमने हमारे खून पसीने की कमाई जोड़ जोड़ कर रुपया जमा की अब से भी वाले भी हमारे साथ धोखा ही कर रहे हैं

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